EPFO Rules Changed: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने लाखों कर्मचारियों को राहत देते हुए EPFO 3.0 को लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत पीएफ खाते से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। यह फैसला 13 अक्टूबर को हुई केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने की। नए नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को जरूरत के समय जल्दी और आसान तरीके से पीएफ की रकम उपलब्ध कराना है।
आइए जानते हैं कि EPFO 3.0 के तहत किन परिस्थितियों में और कितना पैसा निकाला जा सकेगा।
बेरोजगारी की स्थिति में PF निकासी के नए नियम
पहले नियमों के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी लगातार 1 महीने तक बेरोजगार रहता था, तो वह पीएफ का 75% निकाल सकता था और बाकी 25% दो महीने बाद मिलते थे।
अब नए नियमों के तहत कर्मचारी तुरंत 75% राशि निकाल सकता है। वहीं, अगर कर्मचारी लगातार 12 महीने तक बेरोजगार रहता है, तो उसे पूरी PF राशि निकालने की अनुमति होगी।
नौकरी छूटने के बाद पेंशन निकासी
पहले कर्मचारी बेरोजगारी के दो महीने बाद पेंशन की राशि निकाल सकते थे।
लेकिन EPFO 3.0 में इस नियम को सख्त किया गया है। अब कर्मचारी 36 महीने (3 साल) बाद ही पेंशन फंड की राशि निकाल सकेंगे।
कंपनी बंद होने की स्थिति में बदलाव
पुराने नियमों में कंपनी बंद होने पर कर्मचारी अपने पीएफ खाते की पूरी राशि निकाल सकता था।
नए नियमों के अनुसार अब कर्मचारी EPF कॉर्पस का केवल 75% ही निकाल पाएगा। बाकी 25% राशि को न्यूनतम बैलेंस के रूप में खाते में बनाए रखना अनिवार्य होगा।
मेडिकल खर्च के लिए PF निकासी
मेडिकल जरूरतों के लिए पहले भी कर्मचारी
6 महीने की बेसिक सैलरी + DA
या
कर्मचारी का अंशदान (जो भी कम हो)
निकाल सकता था।
नए नियमों में यह व्यवस्था बरकरार रखी गई है, लेकिन अब इसके लिए कम से कम 12 महीने की समान सेवा अनिवार्य कर दी गई है।
शिक्षा और विवाह के लिए निकासी सीमा बढ़ी
पहले नियमों के अनुसार, 7 साल की नौकरी के बाद कर्मचारी अपने योगदान का 50% निकाल सकता था।
निकासी की सीमा:
शिक्षा के लिए , 3 बार
शादी के लिए , 2 बार
EPFO 3.0 में यह सीमा बढ़ा दी गई है
शिक्षा के लिए 10 बार पैसा निकाल सकते हैं।
शादी के लिए 5 बार निकासी है।
घर खरीदने या निर्माण के नियम
पहले घर खरीदने या बनवाने के लिए 24 से 36 महीने की नौकरी जरूरी थी और यह सुविधा सिर्फ एक बार मिलती थी।
अब नए नियमों के तहत सभी प्रकार की आंशिक निकासी के लिए कम से कम 12 महीने की नौकरी पर्याप्त होगी।